- डीआईजी और एसपी की मौजूदगी में उज्जैन में हुई बलवा ड्रिल: जवानों को दिया प्रशिक्षण, सिखाई गई भीड़ प्रबंधन तकनीक
- सूर्य के मीन राशि में प्रवेश से लगेगा मलमास, विवाह-गृहप्रवेश पर एक माह की रोक; इसी अवधि में आएंगे चैत्र नवरात्र
- वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन के बाद सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए: रजत शेषनाग मुकुट और मुण्डमाला में सजे बाबा महाकाल, श्रद्धालुओं ने किए दर्शन!
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: रजत चंद्र और गुलाब माला से सजे बाबा, स्वस्ति वाचन के बाद खुले चांदी के पट!
- धुलेंडी के साथ उज्जैन में शुरू हुआ गणगौर पर्व, महिलाएं 16 दिनों तक करेंगी पूजा; राजस्थान से मंगवाई जाती हैं ड्रेस
बाबा महाकाल को गर्मी से बचाने के लिए बंधेगी गलंतिका:मंदिर के गर्भगृह में मिट्टी के 11 कलशों से प्रवाहित होगी जलधारा
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को शीतलता प्रदान करने के लिए गलंतिका बांधी जाएगी। वैशाख कृष्ण प्रतिपदा 7 अप्रैल से परंपरा अनुसार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तक दो माह मिट्टी के 11 कलश से भगवान महाकाल पर सतत जलधारा प्रवाहित होगी। यह क्रम प्रतिदिन सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा।
वैशाख मास में अधिक गर्मी होती है। ऐसे में भगवान महाकाल को शीतलता प्रदान करने के लिए मिट्टी के 11 कलशों को गर्भगृह में बांधकर जलधारा प्रवाहित की जाएगी। पं.महेश पुजारी ने बताया कि समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने गरल (विष) पान किया था। गरल अग्नि शमन के लिए भगवान शिव के जलाभिषेक की परंपरा है। वैशाख व ज्येष्ठ मास में गर्मी अधिक होती है। गर्मी के इन दिनों में विष की उष्णता और बढ़ जाती है। इसलिए इन दो माह भगवान के शीश पर मिट्टी के कलशों की गलंतिका बांधी जाती है। जिससे शीतल जलधारा प्रवाहित कर भगवान को गर्मी से राहत प्रदान की जाती है। परंपरा अनुसार वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से ज्येष्ठ महिने की पूर्णिमा तक दो माह गलंतिका बांधी जाएगी। इसी तरह मंगलनाथ व अंगारेश्वर महादेव मंदिर में भी 7 अप्रैल वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से गलंतिका बांधी जाएगी। मान्यता है कि महामंगल को अंगारकाय कहा जाता है। मंगल की प्रकृति गर्म होने से गर्मी के दिनों में अंगारक देव को शीतलता प्रदान करने के लिए गलंतिका बांधी जाती है।