- उज्जैन में दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल: दूल्हे ने लौटाए 50 लाख के कैश और सोना, सिर्फ अंगूठी ली
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर खुले चांदी द्वार, बाबा का हुआ पंचामृत अभिषेक
- सिंहस्थ के लिए पुलिस को तैयार कर रहा प्रशासन: उज्जैन में पुलिस अफसरों की 21 दिन की खास ट्रेनिंग शुरू, 41 विषयों पर रहेगा फोकस; 117 अधिकारी बनेंगे “मास्टर ट्रेनर”
- उज्जैन में भस्म आरती में शामिल हुए बिहार के पूर्व डिप्टी CM विजय सिन्हा: नंदी हॉल में बैठकर किए दर्शन, महाकाल से मांगा आशीर्वाद
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: त्रिपुण्ड, त्रिशूल और डमरू से सजे बाबा, गूंजी ‘जय श्री महाकाल’
बाबा महाकाल को गर्मी से बचाने के लिए बंधेगी गलंतिका:मंदिर के गर्भगृह में मिट्टी के 11 कलशों से प्रवाहित होगी जलधारा
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को शीतलता प्रदान करने के लिए गलंतिका बांधी जाएगी। वैशाख कृष्ण प्रतिपदा 7 अप्रैल से परंपरा अनुसार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तक दो माह मिट्टी के 11 कलश से भगवान महाकाल पर सतत जलधारा प्रवाहित होगी। यह क्रम प्रतिदिन सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगा।
वैशाख मास में अधिक गर्मी होती है। ऐसे में भगवान महाकाल को शीतलता प्रदान करने के लिए मिट्टी के 11 कलशों को गर्भगृह में बांधकर जलधारा प्रवाहित की जाएगी। पं.महेश पुजारी ने बताया कि समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने गरल (विष) पान किया था। गरल अग्नि शमन के लिए भगवान शिव के जलाभिषेक की परंपरा है। वैशाख व ज्येष्ठ मास में गर्मी अधिक होती है। गर्मी के इन दिनों में विष की उष्णता और बढ़ जाती है। इसलिए इन दो माह भगवान के शीश पर मिट्टी के कलशों की गलंतिका बांधी जाती है। जिससे शीतल जलधारा प्रवाहित कर भगवान को गर्मी से राहत प्रदान की जाती है। परंपरा अनुसार वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से ज्येष्ठ महिने की पूर्णिमा तक दो माह गलंतिका बांधी जाएगी। इसी तरह मंगलनाथ व अंगारेश्वर महादेव मंदिर में भी 7 अप्रैल वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से गलंतिका बांधी जाएगी। मान्यता है कि महामंगल को अंगारकाय कहा जाता है। मंगल की प्रकृति गर्म होने से गर्मी के दिनों में अंगारक देव को शीतलता प्रदान करने के लिए गलंतिका बांधी जाती है।